
लिवर को स्वस्थ रखने के लिए पीयें मुलेठी की चाय------------------ यदि आप लिवर की समस्याओं से ग्रस्त हैं या अपने लिवर को हमेशा स्वस्थ बनाए रखना चाहते हैं तो आज से ही मुलेठी की चाय पीना शुरू कर दे। मुलेठी की चाय के औषधिक गुणों का जिक्र हमारे आर्युवेद में भी किया गया हैं। इसका नियमित रूप से सेवन करने से लिवर मजबूत बनता हैं। मुलेठी की चाय बनाने के लिए यह विधि अपनाए-
1-एक चुटकी मुलेठी के पाउडर को उबलते हुए पानी में डालें। इसके बाद उसमे थोड़ी सी चायपत्ती भी डालें। इस चाय को दस मिनट तक उबाल कर छान लें । जहाँ तक हो सके इसे सुबह गरमागरम ही पियें।
2-दूसरा तरीका यह हैं कि मुलेठी की जड़ का पाउडर बनाकर इसे उबलते पानी में डालें। जब यह ठंड़ा हो जाए तो इसे छान लें। इस चाय रुपी पानी को दिन में एक या दो बार पिएं। पानी में घुली हुई मुलेठी कार्बन टेट्राक्लोराइड से उत्पन्न टॉक्सिक के खिलाफ काफी असरदार है।
3-कीमोथेरेपी से लीवर को जो नुकसान पहुंचती है उसमें भी मुलेठी का सेवन लिवर को बचाने का काम करती है। यह लीवर के अंदर होने वाली फ्री रेडिकल डैमेज को कम करती है। यही कारण है कि डॉक्टर हेपाटाइटिस बी की बीमारी में मुलेठी खाने की सलाह देते हैं।
जो लोग नॉन एल्कोहालिक फैटी लिवर रोगों (जब लिवर में फैट की मात्रा बढ़ जाती है) से पीड़ित होते हैं, उनके लीवर में ट्रांसएमाइनेज एंजाइम्स ALT और AST की मात्रा बढ़ जाती है। स्टडी के मुताबिक मुलेठी का सत्व इन एंजाइम्स की मात्रा को लिवर से कम करता है। इसलिए मुलेठी लिवर के लिए लाभप्रद है। लिवर से निकलने वाले बाइल जूस के स्राव में भी मुलेठी काफी असरदार होती है।
4-ग्लिसराइजिक एसिड के होने के कारण इसका स्वाद साधारण शक्कर से पचास गुना अधिक मीठा होता है। मुलेठी को इसके मीठे स्वाद और एंटी अल्सर एक्शन के लिए जाना जाता है। यह इंटरफेरॉन के बनने में भी मदद करती है जो कि एक प्रकार की इम्यून कोशिका होती है जो लीवर को बैक्टीरिया से बचाती है।